Sunday, 27 November 2016

विभावरी

dew images के लिए चित्र परिणाम

शिशिर की शितित विभावरी का अवसान समीप था 

शस्य श्यामल धरा पर दूर्वादल आवरतित था!
बिखरे खद्योतों मध्य  शीतल हिमांशु आलोकित!
निस्तब्ध निशा में दे रहा चांदनी का अर्ध्य !!

 उष्मांक कम्पित पवन का ओसांक से अवनत हुआ !
शीत से ठिठुरकर समीर ने जलकणों को विलग किया !!
अलग विलग जलकणों ने द्रुम-दूर्वादल पर आश्रय लिया
पृष्ठ तनाव प्रभाव से मोती सम ओस रूप धारण किया !!



प्रातःकाल में मणि -सम श्वेतबिंदु से हो आकर्षित ,भोर की पहली किरण शबनम से जाती लिपट !!     !            !        !मुक्तिका को स्वर्ण रश्मियाँ उषा का सन्देश सुनाती ! मिलन की इस वेला में सतरंगी आभा बिखराती !!

विभावरी

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शिशिर की शितित विभावरी का अवसान समीप था 

शस्य श्यामल धरा पर दूर्वादल आवरतित था!
बिखरे खद्योतों मध्य  शीतल हिमांशु आलोकित!
निस्तब्ध निशा में दे रहा चांदनी का अर्ध्य !!

 उष्मांक कम्पित पवन का ओसांक से अवनत हुआ !
शीत से ठिठुरकर समीर ने जलकणों को विलग किया !!
अलग विलग जलकणों ने द्रुम-दूर्वादल पर आश्रय लिया
पृष्ठ तनाव प्रभाव से मोती सम ओस रूप धारण किया !!



प्रातःकाल में मणि -सम श्वेतबिंदु से हो आकर्षित ,भोर की पहली किरण शबनम से जाती लिपट !!     !            !        !मुक्तिका को स्वर्ण रश्मियाँ उषा का सन्देश सुनाती ! मिलन की इस वेला में सतरंगी आभा बिखराती !!