शस्य
श्यामल धरा पर दूर्वादल आवरतित था!
बिखरे खद्योतों मध्य शीतल हिमांशु आलोकित!
निस्तब्ध निशा में दे रहा चांदनी का अर्ध्य !!
उष्मांक कम्पित पवन का ओसांक से अवनत हुआ !
शीत से ठिठुरकर समीर ने जलकणों को विलग किया !!
अलग विलग जलकणों ने द्रुम-दूर्वादल पर आश्रय लिया
पृष्ठ तनाव प्रभाव से मोती सम ओस रूप धारण किया !!
शीत से ठिठुरकर समीर ने जलकणों को विलग किया !!
अलग विलग जलकणों ने द्रुम-दूर्वादल पर आश्रय लिया
पृष्ठ तनाव प्रभाव से मोती सम ओस रूप धारण किया !!
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