वसुधा के आंगन में
बसन्त का आगमन कैसे।
पुष्पों के रंगों में
भर दी हो मुस्कराहट जैसे।
धरा की सौंधी गन्ध का प्रसारण किसी ओर।
महकती कलियों की खुशबु छायी चहुँ ओर।
पिक ने पुकारा प्रिया को इस ओर।
कोयल भी कूकने लगी कुँजन में किसी ओर।
भोर की आभा में प्रभा यू मुस्कराने लगी।
मानो प्रियवर को पाकर यू खिलखिलाने लगी।
रवि रश्मियों के रथ पर होकर सवार।
उषा ने भी किया गगन की ओर प्रयाण।
आजाओ प्रिया इस महकते उपवन में।
फागुन के रास रंग में हो जाये सराबोर।।


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